अपने अधूरे ख़्वाब की ता'बीर खींच ली
By mahwar-sirsiviJanuary 3, 2024
अपने अधूरे ख़्वाब की ता'बीर खींच ली
आँखों ने कू-ए-यार की तस्वीर खींच ली
शाख़-ए-शजर से खिलता हुआ फूल तोड़ कर
माली ने गुल से हुस्न की तासीर खींच ली
बल खा के ज़ुल्फ़-ए-यार यूँ चेहरे पे आ गिर
जैसे कि शहसवार ने शमशीर खींच ली
मुंसिफ़ का 'अद्ल देखिए ज़रदार के लिए
ग़ुर्बत-ज़दा के हाथ से जागीर खींच ली
आँखों से मेरी हज़रत-ए-याक़ूब ने कहा
यूसुफ़ तिरी जुदाई ने तनवीर खींच ली
बिल्कुल सफ़ेद हो गए मेरे सियाह बाल
अय्याम-ए-ग़म ने रौनक़-ए-तक़दीर खींच ली
उस के सिपुर्द कर के उजालों की अंजुमन
'महवर' ने अपनी सम्त शब-ए-तीर खींच ली
आँखों ने कू-ए-यार की तस्वीर खींच ली
शाख़-ए-शजर से खिलता हुआ फूल तोड़ कर
माली ने गुल से हुस्न की तासीर खींच ली
बल खा के ज़ुल्फ़-ए-यार यूँ चेहरे पे आ गिर
जैसे कि शहसवार ने शमशीर खींच ली
मुंसिफ़ का 'अद्ल देखिए ज़रदार के लिए
ग़ुर्बत-ज़दा के हाथ से जागीर खींच ली
आँखों से मेरी हज़रत-ए-याक़ूब ने कहा
यूसुफ़ तिरी जुदाई ने तनवीर खींच ली
बिल्कुल सफ़ेद हो गए मेरे सियाह बाल
अय्याम-ए-ग़म ने रौनक़-ए-तक़दीर खींच ली
उस के सिपुर्द कर के उजालों की अंजुमन
'महवर' ने अपनी सम्त शब-ए-तीर खींच ली
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