मैं अश्कों की ज़बानी लिख रहा हूँ

By farooque-adilJanuary 2, 2024
मैं अश्कों की ज़बानी लिख रहा हूँ
मोहब्बत की कहानी लिख रहा हूँ
ज़माने की रविश लिखना है मुझ को
हुआ हूँ पानी पानी लिख रहा हूँ


वरक़ महदूद हैं अर्ज़-ओ-समा के
मैं रब की मेहरबानी लिख रहा हूँ
बुरे वक़्तों में जिन को याद हूँ मैं
उन्हीं को ख़ानदानी लिख रहा हूँ


ख़िरद की गोद में बैठा हुआ मैं
जुनूँ की लन-तरानी लिख रहा हूँ
मैं चढ़ कर मस्लहत के पर्बतों पर
बख़ीलों को भी दानी लिख रहा हूँ


तिरे बख़्शे हुए ज़ख़्मों को जानाँ
मोहब्बत की निशानी लिख रहा हूँ
मैं ख़्वाबों की घनी छाँव में 'फ़ारूक़'
तसव्वुर के म'आनी लिख रहा हूँ


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