मैं तो समझा था कि है उस से शनासाई बहुत

By ustad-vajahat-husain-khanJanuary 5, 2024
मैं तो समझा था कि है उस से शनासाई बहुत
उस से मिल कर हुई लेकिन मिरी रुस्वाई बहुत
सब से अहमक़ है वो नादान भी दीवाना भी
जिस को लगता है कि रखता है वो दानाई बहुत


हाँ बुरे वक़्त में देते हैं वो धोका इक दिन
हम दिल-ओ-जाँ से करें जिन की पज़ीराई बहुत
इक क़दम भी न हटा अपनी रविश से मैं कभी
और सब करते रहे बादिया-पैमाई बहुत


क़ौल और फ़े'ल में देखा है तज़ाद उन के भी
जिन की दुनिया में है मशहूर मसीहाई बहुत
अब तो आ जा कि तिरे बिन हुआ जीना मुश्किल
दिल को बेचैन किया करती है तन्हाई बहुत


'इज़्ज़त-ए-नफ़्स बढ़ाने में लगा था 'दाएम'
तुझ से मिलने पे मिली है मुझे रुस्वाई बहुत
44915 viewsghazalHindi