मैं ने तो कभी उस को मुसलसल नहीं देखा

By habib-rehmanJanuary 3, 2024
मैं ने तो कभी उस को मुसलसल नहीं देखा
चेहरा भी कभी उस का मुकम्मल नहीं देखा
आँखों के नशे से मुझे फ़ुर्सत ही नहीं थी
बस इस लिए मैं ने कभी काजल नहीं देखा


मज़दूर गिरफ़्तार है फ़ाक़ों के जहाँ में
ऐसों ने कभी सब्र का वो फल नहीं देखा
वाजिब थी मिरी राह-ए-मोहब्बत में वो ठोकर
मैं ने कभी रस्ते में जो सिगनल नहीं देखा


यार-ए-दिल-ए-'रहमान' जुनूँ से डरा है बस
उस ने यहाँ मुझ सा कोई पागल नहीं देखा
52682 viewsghazalHindi