माना कि उसे हम से कभी प्यार नहीं था
By bazm-ansariJanuary 2, 2024
माना कि उसे हम से कभी प्यार नहीं था
ज़ालिम मगर इतना भी दिल-आज़ार नहीं था
हम जिस से तवक़्क़ो' पे मनाने की ख़फ़ा थे
वो नाम भी सुनने का रवादार नहीं था
मदहोशी-ए-उल्फ़त में 'अजब बे-ख़बरी थी
दिल होश में आ कर भी ख़बर-दार नहीं था
सोचा था कड़ी धूप में यारों के महल हैं
देखा तो कहीं साया-ए-दीवार नहीं था
ग़म और भी थे यूँ तो ग़म-ए-यार से पहले
ऐसा भी मगर हाल-ए-दिल-ए-ज़ार नहीं था
ये तल्ख़ हक़ाएक़ भी हैं अपनों ही से मंसूब
ग़ैरों में कोई दर-प-ए-आज़ार नहीं था
काम उन से पड़ा 'बज़्म' कि जिन फ़ित्ना-गरों से
जी बात भी करने का रवादार नहीं था
ज़ालिम मगर इतना भी दिल-आज़ार नहीं था
हम जिस से तवक़्क़ो' पे मनाने की ख़फ़ा थे
वो नाम भी सुनने का रवादार नहीं था
मदहोशी-ए-उल्फ़त में 'अजब बे-ख़बरी थी
दिल होश में आ कर भी ख़बर-दार नहीं था
सोचा था कड़ी धूप में यारों के महल हैं
देखा तो कहीं साया-ए-दीवार नहीं था
ग़म और भी थे यूँ तो ग़म-ए-यार से पहले
ऐसा भी मगर हाल-ए-दिल-ए-ज़ार नहीं था
ये तल्ख़ हक़ाएक़ भी हैं अपनों ही से मंसूब
ग़ैरों में कोई दर-प-ए-आज़ार नहीं था
काम उन से पड़ा 'बज़्म' कि जिन फ़ित्ना-गरों से
जी बात भी करने का रवादार नहीं था
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