माँग पास-ए-वफ़ा मोहब्बत में

By habib-rehmanJanuary 3, 2024
माँग पास-ए-वफ़ा मोहब्बत में
रूठ जाता है यार हसरत में
ज़िक्र मौजूदगी का करता है
पास रहता नहीं वो ग़ुर्बत में


सुनते ही नग़्मा-ए-वफ़ा मेरा
आ ही जाता है फिर वो हरकत में
हाल पूछा न कर तू अब मेरा
अब रखा कुछ नहीं तबी'अत में


कर दिया पल में रेज़ा रेज़ा दिल
अब लगेगी सदी मरम्मत में
तू ने मक़्तल समझ लिया था दिल
क्या मिला तुझ को इस बग़ावत में


तू मुझे ये बता के तो जाता
कैसे जीते हैं यार फ़ुर्क़त में
तुम कभी पढ़ नहीं सकोगे ग़म
जो लिखे हैं 'हबीब' के ख़त में


72294 viewsghazalHindi