मशक़्क़त का पसीना ख़ून में तहलील होता है
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
मशक़्क़त का पसीना ख़ून में तहलील होता है
अंधेरा रौशनी में तब कहीं तब्दील होता है
बिछड़ते ही किसी से हो गया एहसास ये हम को
कि रस्ता किस तरह इक मील का सौ मील होता है
ये ऊँचे लोग खुल कर मिल नहीं सकते कभी तुम से
समुंदर भी सिमट कर क्या कहीं पर झील होता है
हज़ारों ख़ून की बूँदें फ़ना हो जाती हैं जल कर
तब इक आँसू किसी की राह की क़िंदील होता है
मिरी हैरत में होता है इज़ाफ़ा किस क़दर 'नादिर'
वो इक चेहरा कई चेहरों में जब तहलील होता है
अंधेरा रौशनी में तब कहीं तब्दील होता है
बिछड़ते ही किसी से हो गया एहसास ये हम को
कि रस्ता किस तरह इक मील का सौ मील होता है
ये ऊँचे लोग खुल कर मिल नहीं सकते कभी तुम से
समुंदर भी सिमट कर क्या कहीं पर झील होता है
हज़ारों ख़ून की बूँदें फ़ना हो जाती हैं जल कर
तब इक आँसू किसी की राह की क़िंदील होता है
मिरी हैरत में होता है इज़ाफ़ा किस क़दर 'नादिर'
वो इक चेहरा कई चेहरों में जब तहलील होता है
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