मौजों की जंग है सफ़ीने से
By surender-sagarJanuary 5, 2024
मौजों की जंग है सफ़ीने से
यार पेश आओ अब क़रीने से
एक तो ज़ुल्फ़ें थीं खुली उस की
दूसरा चेहरा तर पसीने से
छत से कोई तो चाँद गुज़रा है
चाँदनी उतरी मेरे ज़ीने से
जाम से ग़म भुलाने की सोची
और याद आ गई वो पीने से
यार पेश आओ अब क़रीने से
एक तो ज़ुल्फ़ें थीं खुली उस की
दूसरा चेहरा तर पसीने से
छत से कोई तो चाँद गुज़रा है
चाँदनी उतरी मेरे ज़ीने से
जाम से ग़म भुलाने की सोची
और याद आ गई वो पीने से
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