मौसम-ए-वक़्त बदलना है बदल जाएगा
By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
मौसम-ए-वक़्त बदलना है बदल जाएगा
अज़दहा रात का सूरज को निगल जाएगा
शीशा-ए-दिल की सफ़ाई पे तवज्जोह दीजे
मौसम-ए-वक़्त बहर-हाल बदल जाएगा
बस वही दोस्तो इस दौर का मूसा होगा
राह पानी में बना कर जो निकल जाएगा
साथ जो माँ की दु'आएँ हैं तो इंशा-अल्लाह
हादिसा राह में आएगा तो टल जाएगा
क्या ख़बर थी कि ज़रा चैन के दिन आते ही
मेरे हमसाए का लहजा ही बदल जाएगा
लोग आ जाएँगे मिट्टी के हवाले कर के
तेरे हमराह फ़क़त तेरा 'अमल जाएगा
आँच ईसार के शो'लों की दिखाओ 'आलम'
सख़्त पत्थर भी जो होगा तो पिघल जाएगा
अज़दहा रात का सूरज को निगल जाएगा
शीशा-ए-दिल की सफ़ाई पे तवज्जोह दीजे
मौसम-ए-वक़्त बहर-हाल बदल जाएगा
बस वही दोस्तो इस दौर का मूसा होगा
राह पानी में बना कर जो निकल जाएगा
साथ जो माँ की दु'आएँ हैं तो इंशा-अल्लाह
हादिसा राह में आएगा तो टल जाएगा
क्या ख़बर थी कि ज़रा चैन के दिन आते ही
मेरे हमसाए का लहजा ही बदल जाएगा
लोग आ जाएँगे मिट्टी के हवाले कर के
तेरे हमराह फ़क़त तेरा 'अमल जाएगा
आँच ईसार के शो'लों की दिखाओ 'आलम'
सख़्त पत्थर भी जो होगा तो पिघल जाएगा
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