मौसम-ए-वक़्त बदलना है बदल जाएगा

By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
मौसम-ए-वक़्त बदलना है बदल जाएगा
अज़दहा रात का सूरज को निगल जाएगा
शीशा-ए-दिल की सफ़ाई पे तवज्जोह दीजे
मौसम-ए-वक़्त बहर-हाल बदल जाएगा


बस वही दोस्तो इस दौर का मूसा होगा
राह पानी में बना कर जो निकल जाएगा
साथ जो माँ की दु'आएँ हैं तो इंशा-अल्लाह
हादिसा राह में आएगा तो टल जाएगा


क्या ख़बर थी कि ज़रा चैन के दिन आते ही
मेरे हमसाए का लहजा ही बदल जाएगा
लोग आ जाएँगे मिट्टी के हवाले कर के
तेरे हमराह फ़क़त तेरा 'अमल जाएगा


आँच ईसार के शो'लों की दिखाओ 'आलम'
सख़्त पत्थर भी जो होगा तो पिघल जाएगा
55337 viewsghazalHindi