मौसमों का है तक़ाज़ा चूम लो
By mukesh-sharma-manmaujiJanuary 4, 2024
मौसमों का है तक़ाज़ा चूम लो
क्या कहें इस से ज़ियादा चूम लो
यूँ तो पहले वस्ल में जाएज़ नहीं
गर मुक़द्दस है इरादा चूम लो
तुम बड़े ज़िद्दी हो मानोगे नहीं
ठीक है अच्छा लो बाबा चूम लो
रफ़्ता-रफ़्ता पार होंगी सीढ़ियाँ
‘आरिज़ों से पहले माथा चूम लो
क्या कहें इस से ज़ियादा चूम लो
यूँ तो पहले वस्ल में जाएज़ नहीं
गर मुक़द्दस है इरादा चूम लो
तुम बड़े ज़िद्दी हो मानोगे नहीं
ठीक है अच्छा लो बाबा चूम लो
रफ़्ता-रफ़्ता पार होंगी सीढ़ियाँ
‘आरिज़ों से पहले माथा चूम लो
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