मिरा दम रहेगा जब तक ये हमा-हमी रहेगी

By kaleem-aajizJanuary 3, 2024
मिरा दम रहेगा जब तक ये हमा-हमी रहेगी
न मिरा गला रहेगा न तिरी छुरी रहेगी
जो सितम रहा रहेगा जो वफ़ा रही रहेगी
न इधर कमी रहेगी न उधर कमी रहे रहेगी


तिरी मेहरबानियों से कई बार मर चुका हूँ
अभी और भी मरूँगा जो ये ज़िंदगी रहेगी
कभी आप ज़ख़्म देंगे कभी हम ग़ज़ल कहेंगे
जहाँ आप हम रहेंगे यही दिल-लगी रहेगी


वो किसी की अंजुमन हो कोई शम'-ए-अंजुमन हो
जिसे हम लहू न देंगे वो बुझी बुझी रहेगी
तू सजा बना के ज़ुल्फ़ें यूँ अकड़ के क्या चले है
न बनी रही किसी की न तिरी बनी रहेगी


जहाँ तुम रहोगे प्यारे वहाँ दर्द-ए-दिल रहेगा
जहाँ दर्द-ए-दिल रहेगा वहाँ शा'इरी रहेगी
ये तो 'आम मै-कदा है तिरा घर नहीं है साक़ी
वो सुबू उठा ही लेगा जिसे तिश्नगी रहेगी


ग़म-ए-दिल ग़म-ए-ज़माना गले मिल गए हैं 'आजिज़'
जो ग़ज़ल भी मैं कहूँगा बड़ी चाशनी रहेगी
64001 viewsghazalHindi