मेरा रस्ता बदल गया होता
By ahmed-arsalanJanuary 1, 2024
मेरा रस्ता बदल गया होता
तू भी आगे निकल गया होता
मो'तरिफ़ होता इक जहाँ मेरा
मैं जो गिर कर सँभल गया होता
न ही होता गिला किसी से मुझे
मुझ से गर तू बहल गया होता
आ के तेरे ख़याल में अक्सर
मैं भी साँचे में ढल गया होता
इक नज़र तुम जो देख लेते मुझे
मैं ख़ुशी से मचल गया होता
साथ होता जो आप का 'अहमद'
हादिसा सर से टल गया होता
तू भी आगे निकल गया होता
मो'तरिफ़ होता इक जहाँ मेरा
मैं जो गिर कर सँभल गया होता
न ही होता गिला किसी से मुझे
मुझ से गर तू बहल गया होता
आ के तेरे ख़याल में अक्सर
मैं भी साँचे में ढल गया होता
इक नज़र तुम जो देख लेते मुझे
मैं ख़ुशी से मचल गया होता
साथ होता जो आप का 'अहमद'
हादिसा सर से टल गया होता
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