मिरी ख़ता से बड़ी तेरी दरगुज़र होगी

By badiuzzaman-saharJanuary 19, 2024
मिरी ख़ता से बड़ी तेरी दरगुज़र होगी
तो फिर दु'आ मिरी काहे को बे-असर होगी
ये मेरे दिल के सफ़र की है कौन सी मंज़िल
पता नहीं है मुसाफ़िर को तो ख़बर होगी


नहा के शब में ही गेसू झटक के खोल दिए
तो किस तरह से मिरी जान अब सहर होगी
ख़ुदा दराज़ करे 'उम्र तेरी ज़ुल्फ़ों की
शब-ए-विसाल बला से जो मुख़्तसर होगी


जो मुझ से लेना है ले ले मता’-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र
वगरना दुनिया ब-कश्कोल दर-ब-दर होगी
उठेगा शोर-ए-क़यामत बपेगा हश्र 'सहर'
जो उन की गुर्ग-शनासाई मो'तबर होगी


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