मोहब्बत का किसी सूरत कोई पहलू नहीं निकले

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
मोहब्बत का किसी सूरत कोई पहलू नहीं निकले
सियासत चाहती है फूल से ख़ुशबू नहीं निकले
सुना है दर्द घट जाता है जब इंसान रोता है
मगर वो क्या करें जिस के कभी आँसू नहीं निकले


न जाने मस्लहत की कौन सी चादर में लिपटे हैं
अंधेरा बढ़ गया लेकिन अभी जुगनू नहीं निकले
मोहब्बत के मुसाफ़िर को तरसती ही रही बस्ती
कभी सूफ़ी नहीं निकले कभी साधू नहीं निकले


थकन से चूर हो कर गिर गया बिस्तर पे मैं अपने
मगर अब तक तिरी तस्वीर से बाज़ू नहीं निकले
93531 viewsghazalHindi