मोहब्बतों के मज़े तू ने कुछ कमाए नहीं
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
मोहब्बतों के मज़े तू ने कुछ कमाए नहीं
निशान हिज्र के तेरे बदन पे आए नहीं
बस एक गुज़रा त'अल्लुक़ निभाने बैठे हैं
वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं
हज़ार बार मुलाक़ात आइने से हुई
वो रख-रखाव के मौसम पलट के आए नहीं
कई दिनों से मिरे घर में दिन नहीं निकला
कई दिनों से मिरे ज़ख़्म मुस्कुराए नहीं
ये एहतियात भी बरती गई त'अल्लुक़ में
कि दोनों साथ रहे और दिए बुझाए नहीं
निशान हिज्र के तेरे बदन पे आए नहीं
बस एक गुज़रा त'अल्लुक़ निभाने बैठे हैं
वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं
हज़ार बार मुलाक़ात आइने से हुई
वो रख-रखाव के मौसम पलट के आए नहीं
कई दिनों से मिरे घर में दिन नहीं निकला
कई दिनों से मिरे ज़ख़्म मुस्कुराए नहीं
ये एहतियात भी बरती गई त'अल्लुक़ में
कि दोनों साथ रहे और दिए बुझाए नहीं
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