मोहब्बतों को कहीं से मदद नहीं मिलती

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
मोहब्बतों को कहीं से मदद नहीं मिलती
ये जंग ऐसी है जिस में रसद नहीं मिलती
ये ख़्वाब मर के भी आँखों में रक्खे रहते हैं
ये लाशे ऐसे हैं जिन को लहद नहीं मिलती


ये नफ़रतों की मसाफ़त तवील है कितनी
तमाम 'उम्र चलो फिर भी हद नहीं मिलती
किसी किसी का लहू आँसुओं में बहता है
मोहब्बतों की सभी को सनद नहीं मिलती


मैं एक हर्फ़-ए-ग़लत हूँ सुबूत में इस के
कोई दलील उसे मुस्तनद नहीं मिलती
19899 viewsghazalHindi