मोहब्बतों में भी थोड़ा अदब ज़रूरी था
By sonia-aks-sonamJanuary 5, 2024
मोहब्बतों में भी थोड़ा अदब ज़रूरी था
फिर उस के बा'द में जो कुछ था सब ज़रूरी था
मैं कह रही थी कि इंसानियत ज़रूरी थी
वो कह रहा था कि नाम-ओ-नसब ज़रूरी था
तमाम 'उम्र रहा यूँ तो साया बन के मगर
वो तब नहीं था मिरे पास जब ज़रूरी था
मैं वर्ना देख नहीं पाती उस को जाते हुए
दिए बुझाना जुदाई की शब ज़रूरी था
हमें भी रोग मोहब्बत का लग गया था हुज़ूर
हमारा होना भी फिर जाँ-ब-लब ज़रूरी था
मुझे ज़रूरी था वो शख़्स ऐसे ही 'सोनम'
कि जैसे दुनिया में बंदों को रब ज़रूरी था
फिर उस के बा'द में जो कुछ था सब ज़रूरी था
मैं कह रही थी कि इंसानियत ज़रूरी थी
वो कह रहा था कि नाम-ओ-नसब ज़रूरी था
तमाम 'उम्र रहा यूँ तो साया बन के मगर
वो तब नहीं था मिरे पास जब ज़रूरी था
मैं वर्ना देख नहीं पाती उस को जाते हुए
दिए बुझाना जुदाई की शब ज़रूरी था
हमें भी रोग मोहब्बत का लग गया था हुज़ूर
हमारा होना भी फिर जाँ-ब-लब ज़रूरी था
मुझे ज़रूरी था वो शख़्स ऐसे ही 'सोनम'
कि जैसे दुनिया में बंदों को रब ज़रूरी था
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