मुझ को मिटा के आप ने यूँ मुस्कुरा दिया
By raft-bahraichiJanuary 4, 2024
मुझ को मिटा के आप ने यूँ मुस्कुरा दिया
जैसे मिरे नसीब को फिर से बना दिया
कहते हैं किस को मौत किसे कहते हैं हयात
सब कुछ तिरी निगाह ने मुझ को बता दिया
अब दिल की ख़ैरियत की दु'आ माँगनी पड़ी
बतलाने को तो 'इश्क़ का मतलब बता दिया
क़ाइल न होता आप की क़ुदरत का कोई भी
अच्छा किया जो मुझ को बना के मिटा दिया
दिल की तरफ़ से सब्र हमें आ गया था कुछ
बेकार ज़िक्र छेड़ के तुम ने रुला दिया
'राफ़त' यहाँ नमाज़ का कोई नहीं है वक़्त
जब नाम उन का सुन लिया सर को झुका दिया
जैसे मिरे नसीब को फिर से बना दिया
कहते हैं किस को मौत किसे कहते हैं हयात
सब कुछ तिरी निगाह ने मुझ को बता दिया
अब दिल की ख़ैरियत की दु'आ माँगनी पड़ी
बतलाने को तो 'इश्क़ का मतलब बता दिया
क़ाइल न होता आप की क़ुदरत का कोई भी
अच्छा किया जो मुझ को बना के मिटा दिया
दिल की तरफ़ से सब्र हमें आ गया था कुछ
बेकार ज़िक्र छेड़ के तुम ने रुला दिया
'राफ़त' यहाँ नमाज़ का कोई नहीं है वक़्त
जब नाम उन का सुन लिया सर को झुका दिया
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