मुझ में है जो दरवेश वो मर जाए तो अच्छा
By shariq-kaifiJanuary 5, 2024
मुझ में है जो दरवेश वो मर जाए तो अच्छा
दुनिया मुझे दुनिया ही नज़र आए तो अच्छा
दोबारा कहीं ताज़ा न हो जाएँ मिरे ज़ख़्म
सोते में तिरा शहर गुज़र जाए तो अच्छा
बहलाऊँगा कब तक मैं उसे झूटी चमक से
सोने का ये पानी भी उतर जाए तो अच्छा
होते हैं बड़ी 'उम्र के अपने बहुत आज़ार
ये ज़ख़्म जवानी में ही भर जाए तो अच्छा
दुनिया के सवालात पे ख़ामोश रहें हम
दोनों ही के घर एक ख़बर जाए तो अच्छा
वहशी को वहाँ ला के जुनूँ छोड़ गया है
घर जाए तो अच्छा नहीं घर जाए तो अच्छा
दुनिया मुझे दुनिया ही नज़र आए तो अच्छा
दोबारा कहीं ताज़ा न हो जाएँ मिरे ज़ख़्म
सोते में तिरा शहर गुज़र जाए तो अच्छा
बहलाऊँगा कब तक मैं उसे झूटी चमक से
सोने का ये पानी भी उतर जाए तो अच्छा
होते हैं बड़ी 'उम्र के अपने बहुत आज़ार
ये ज़ख़्म जवानी में ही भर जाए तो अच्छा
दुनिया के सवालात पे ख़ामोश रहें हम
दोनों ही के घर एक ख़बर जाए तो अच्छा
वहशी को वहाँ ला के जुनूँ छोड़ गया है
घर जाए तो अच्छा नहीं घर जाए तो अच्छा
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