मुझे दिल के अरमाँ से फ़ुर्सत नहीं
By basir-tonkiJanuary 2, 2024
मुझे दिल के अरमाँ से फ़ुर्सत नहीं
यही अब मुसीबत है राहत नहीं
तिरी आरज़ू से तो हूँ बे-उमीद
तुझे भूल जाऊँ ये क़ुदरत नहीं
उन्हें नाज़ है हुस्न पर अपने यूँ
कि उन से सिवा ख़ूबसूरत नहीं
मिले वो न मुझ को तो क्या हो गया
ख़ुदा जानता है कि हसरत नहीं
मोहब्बत में सब ही परेशाँ रहे
ये सुन कर उन्हें तुम से उल्फ़त नहीं
वो वा'दे पे अपने न आए कभी
यही उन की 'आदत है ग़फ़लत नहीं
वहाँ ख़ुद न जाना ऐ 'बासिर' कभी
कि महबूब के दर पे 'इज़्ज़त नहीं
यही अब मुसीबत है राहत नहीं
तिरी आरज़ू से तो हूँ बे-उमीद
तुझे भूल जाऊँ ये क़ुदरत नहीं
उन्हें नाज़ है हुस्न पर अपने यूँ
कि उन से सिवा ख़ूबसूरत नहीं
मिले वो न मुझ को तो क्या हो गया
ख़ुदा जानता है कि हसरत नहीं
मोहब्बत में सब ही परेशाँ रहे
ये सुन कर उन्हें तुम से उल्फ़त नहीं
वो वा'दे पे अपने न आए कभी
यही उन की 'आदत है ग़फ़लत नहीं
वहाँ ख़ुद न जाना ऐ 'बासिर' कभी
कि महबूब के दर पे 'इज़्ज़त नहीं
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