मुझे लगा मिरी क़िस्मत में है लिखा पत्थर
By adnan-akhtar-azmiJanuary 1, 2024
मुझे लगा मिरी क़िस्मत में है लिखा पत्थर
जो मेरे सर पे किसी सू से आ गिरा पत्थर
किसी से जबकि मिरी कोई दुश्मनी भी नहीं
ये किस ने आ के मिरी राह में रखा पत्थर
वो आँसू जिस को कभी लोग गुल समझते थे
जो मेरी आँख से टपका तो हो गया पत्थर
ज़माने मो'जिज़ा-ए-हक़ तो तू ने देखा है
नबी के हुक्म से जब बोलने लगा पत्थर
जो आइने को मुक़ाबिल में रख दिया मैं ने
किसी ने तैश में आ कर उठा लिया पत्थर
सितम-ज़रीफ़ी-ए-हालात के सबब 'अदनान'
जो शख़्स मोम की सूरत था हो गया पत्थर
जो मेरे सर पे किसी सू से आ गिरा पत्थर
किसी से जबकि मिरी कोई दुश्मनी भी नहीं
ये किस ने आ के मिरी राह में रखा पत्थर
वो आँसू जिस को कभी लोग गुल समझते थे
जो मेरी आँख से टपका तो हो गया पत्थर
ज़माने मो'जिज़ा-ए-हक़ तो तू ने देखा है
नबी के हुक्म से जब बोलने लगा पत्थर
जो आइने को मुक़ाबिल में रख दिया मैं ने
किसी ने तैश में आ कर उठा लिया पत्थर
सितम-ज़रीफ़ी-ए-हालात के सबब 'अदनान'
जो शख़्स मोम की सूरत था हो गया पत्थर
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