न तेरी शक्ल से वाक़िफ़ न तेरी बास से लोग

By balraj-hairatJanuary 2, 2024
न तेरी शक्ल से वाक़िफ़ न तेरी बास से लोग
शनाख़्त कैसे करेंगे तुझे क़यास से लोग
किसे ख़बर थी कि राहें क़दम जकड़ लेंगी
चले थे तेरे तजस्सुस में कितनी आस से लोग


न कोई तुफ़ का टहोका न तंज़ के पत्थर
तका किए मुझे क्यों आज बद-हवास से लोग
ये घर भी मेरा है इस की तमाम चीज़ें भी
हर एक गोशे में लेकिन ये नाशनास से लोग


सुना ये है कि पयम्बर हैं दौर-ए-ज़र्रीं के
धुआँ धुआँ सा ये माहौल उदास उदास से लोग
न जाने बो'द ने क्या क्या बना दिया था उन्हें
मिरा ही 'अक्स थे देखे जो मैं ने पास से लोग


हज़ारहा मह-ओ-ख़ुर्शीद हाथ पकड़ेंगे
भटक न जाएँ ख़ला में ये बद-हवास से लोग
ख़ुद आगही इन्हें ऐसा बना गई वर्ना
थे नाशनास न 'हैरत' ये नाशनास से लोग


45956 viewsghazalHindi