नफ़रतें जब जब बढ़ेंगी देखना
By syed-masood-naqviJanuary 5, 2024
नफ़रतें जब जब बढ़ेंगी देखना
बस्तियाँ तब तब जलेंगी देखना
लकड़ियाँ जो रह गईं हैं राख में
आग का बा'इस बनेंगी देखना
जिस तरह तुम जी रही हो ज़िंदगी
मुख़्तलिफ़ बातें बनेंगी देखना
रौशनी के साथ बस चलते रहो
मंज़िलें मिल कर रहेंगी देखना
मर रही हैं ख़्वाहिशें जो वक़्त पर
वक़्त पर वो जी उठेंगी देखना
बात हम में हो रही है जिस तरह
सैंकड़ों बातें बनेंगी देखना
रास हम को आ रही है ज़िंदगी
दिक्कतें बढ़ने लगेंगी देखना
बस्तियाँ तब तब जलेंगी देखना
लकड़ियाँ जो रह गईं हैं राख में
आग का बा'इस बनेंगी देखना
जिस तरह तुम जी रही हो ज़िंदगी
मुख़्तलिफ़ बातें बनेंगी देखना
रौशनी के साथ बस चलते रहो
मंज़िलें मिल कर रहेंगी देखना
मर रही हैं ख़्वाहिशें जो वक़्त पर
वक़्त पर वो जी उठेंगी देखना
बात हम में हो रही है जिस तरह
सैंकड़ों बातें बनेंगी देखना
रास हम को आ रही है ज़िंदगी
दिक्कतें बढ़ने लगेंगी देखना
28697 viewsghazal • Hindi