नई नस्लों से उस को भी कभी 'इज़्ज़त नहीं मिलती

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
नई नस्लों से उस को भी कभी 'इज़्ज़त नहीं मिलती
बुज़ुर्गों से जिसे तहज़ीब की दौलत नहीं मिलती
मोहब्बत के लिए क़ुर्बानियाँ तो देनी पड़ती हैं
किसी को मौत से पहले कभी जन्नत नहीं मिलती


सितम ये है कि मैं जिन के लिए मसरूफ़ रहता हूँ
उन्हीं से बात करने की मुझे फ़ुर्सत नहीं मिलती
जुनून-ए-'इश्क़ हो तो ख़ाक में मिल जाना पड़ता है
घरों में बैठे रहने से कभी शोहरत नहीं मिलती


'अजब इक बे-यक़ीनी ने मिरा दिल घेर रक्खा है
कोई भी हाथ हो सर पर मुझे राहत नहीं मिलती
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