नज़र के सामने गुज़रे हुए ज़माने हैं

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
नज़र के सामने गुज़रे हुए ज़माने हैं
नई रुतें हैं मगर फूल सब पुराने हैं
तुम्हारे साथ ठहर जाऊँ इस जगह कैसे
मुझे तो और कई रास्ते बनाने हैं


जो रिश्ते टूट गए उन को भी निभाना है
हमें तो सूखे हुए फूल भी सजाने हैं
फ़क़ीर कब से खड़ा है यही बताने को
खंडर में दफ़्न अभी और भी ख़ज़ाने हैं


कहाँ से लाएँ वो दुख दर्द बाँटने वाले
यहाँ तो चारों तरफ़ सिर्फ़ कार-ख़ाने हैं
19547 viewsghazalHindi