नाज़-ए-सद-रंग-ओ-जुनूँ-ख़ेज़ इशारे देखे

By ustad-azmat-hussain-khanJanuary 5, 2024
नाज़-ए-सद-रंग-ओ-जुनूँ-ख़ेज़ इशारे देखे
हम ने कितने नए अंदाज़ तुम्हारे देखे
आशियाँ एक नया रोज़ बना लेते हैं
हौसले बर्क़-ए-तपाँ और हमारे देखे


मेरी इस जुरअत-ओ-उम्मीद की दे दाद कोई
मैं ने तूफ़ान की मौजों में किनारे देखे
शायद अंदाज़ किसी में हो तिरी आँखों का
देर तक रात को इस शौक़ में तारे देखे


शम’-ओ-परवाना भी जलते हैं दिल-ए-इंसाँ भी
एक ही हाल में सब 'इश्क़ के मारे देखे
मस्त सैराब हुए एक नज़र में 'मैकश'
उन की आँखों में मय-ए-नाब के धारे देखे


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