निकल ही आती थी सूरत कभी पलटने की
By ismail-raazJanuary 3, 2024
निकल ही आती थी सूरत कभी पलटने की
पर उस ने की नहीं निय्यत कभी पलटने की
तमाम उम्र उसी का इंतिज़ार करते रहे
कि जिस में थी नहीं आदत कभी पलटने की
अब एक संग की सूरत पड़े हैं दर पे तिरे
चुका रहे हैं यूँ क़ीमत कभी पलटने की
वगर्ना वो तो न था इस क़दर भी सख़्त मिज़ाज
हमीं ने की नहीं हिम्मत कभी पलटने की
पर उस ने की नहीं निय्यत कभी पलटने की
तमाम उम्र उसी का इंतिज़ार करते रहे
कि जिस में थी नहीं आदत कभी पलटने की
अब एक संग की सूरत पड़े हैं दर पे तिरे
चुका रहे हैं यूँ क़ीमत कभी पलटने की
वगर्ना वो तो न था इस क़दर भी सख़्त मिज़ाज
हमीं ने की नहीं हिम्मत कभी पलटने की
85346 viewsghazal • Hindi