पड़े हैं ज़द में सभी मेरी आह के अब तक

By ustad-vajahat-husain-khanJanuary 5, 2024
पड़े हैं ज़द में सभी मेरी आह के अब तक
रहे गवाह जो झूटे गुनाह के अब तक
न मोहतसिब हुए हाल-ए-तबाह के अब तक
वो हैं रहीन उसी रस्म-ओ-राह के अब तक


गुनाह कर के हुए जो कभी न शर्मिंदा
भुगत रहे हैं नतीजे गुनाह के अब तक
बस इक यही तो है सरमाया-ए-हयात मिरा
हैं नक़्श दिल पे जमे तेरी चाह के अब तक


वो इक नज़ारा-ए-दिल-दोज़ हम ने देखा था
सुलग रहे हैं दरीचे निगाह के अब तक
उन्हें भी मंज़िल-ए-मक़्सूद हो 'अता यारब
रुके हुए हैं मुसाफ़िर जो राह के अब तक


मुकर गए हैं कई ज़ख़्म दे के वो 'दाएम'
जो हम से करते थे वा'दे निबाह के अब तक
32454 viewsghazalHindi