पहले इक पर्दा हमारे सामने डाला गया
By ahmad-ayazFebruary 24, 2025
पहले इक पर्दा हमारे सामने डाला गया
इस तरह दिलकश नज़ारा आँख से टाला गया
मुस्तक़िल आँखों में इतनी रौशनी डाली गई
जिस की फिर बीनाई से बीनाई का हाला गया
चाँदनी भी तीरगी में तीरगी से जा मिली
जुगनुओं को पैकर-ए-ज़ुल्मत में यूँ ढाला गया
दिल के हर गोशे में पहले अश्क-ए-ख़ूँ बोए गए
तब कहीं जा कर दिलों में 'इश्क़ को पाला गया
जिस्म के सारे 'अनासिर मुंतशिर होने लगे
जब मोहब्बत को हिसार-ए-'अक़्ल से टाला गया
आख़िरश जब राज़ सारे फ़ाश होने वाले थे
तब कहानी में नया किरदार इक डाला गया
इस तरह दिलकश नज़ारा आँख से टाला गया
मुस्तक़िल आँखों में इतनी रौशनी डाली गई
जिस की फिर बीनाई से बीनाई का हाला गया
चाँदनी भी तीरगी में तीरगी से जा मिली
जुगनुओं को पैकर-ए-ज़ुल्मत में यूँ ढाला गया
दिल के हर गोशे में पहले अश्क-ए-ख़ूँ बोए गए
तब कहीं जा कर दिलों में 'इश्क़ को पाला गया
जिस्म के सारे 'अनासिर मुंतशिर होने लगे
जब मोहब्बत को हिसार-ए-'अक़्ल से टाला गया
आख़िरश जब राज़ सारे फ़ाश होने वाले थे
तब कहानी में नया किरदार इक डाला गया
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