पहलू न दुखेगा तो गुज़ारा नहीं होगा
By kaleem-aajizJanuary 3, 2024
पहलू न दुखेगा तो गुज़ारा नहीं होगा
हम सा भी कोई दर्द का मारा नहीं होगा
हर शे'र है तस्वीर मिरे ज़ख़्म-ए-जिगर की
हाँ देख कि फिर ऐसा नज़ारा नहीं होगा
तू सब की सुने है कभी मेरी भी ग़ज़ल सुन
फिर ऐसा ख़ुश-उस्लूब दोबारा नहीं होगा
जिस दर्द से हम तुझ को दिया करते हैं आवाज़
बुलबुल ने भी यूँ गुल को पुकारा नहीं होगा
कल होगी अगर आज परेशाँ नहीं होगी
वो ज़ुल्फ़ जिसे हम ने सँवारा नहीं होगा
शमशीर कभी वक़्त की चल ही नहीं सकती
जब तक तिरी चितवन का इशारा नहीं होगा
जब तर्क-ए-त'अल्लुक़ का सितम झेल चुके हम
फिर कौन सा ग़म है जो गवारा नहीं होगा
दुनिया में मिरी जान के दुश्मन तो बहुत हैं
तुम जैसे हो ऐसा कोई प्यारा नहीं होगा
हम को कोई उम्मीद ज़माने से नहीं है
जो तेरा हुआ है वो हमारा नहीं होगा
हम सा भी कोई दर्द का मारा नहीं होगा
हर शे'र है तस्वीर मिरे ज़ख़्म-ए-जिगर की
हाँ देख कि फिर ऐसा नज़ारा नहीं होगा
तू सब की सुने है कभी मेरी भी ग़ज़ल सुन
फिर ऐसा ख़ुश-उस्लूब दोबारा नहीं होगा
जिस दर्द से हम तुझ को दिया करते हैं आवाज़
बुलबुल ने भी यूँ गुल को पुकारा नहीं होगा
कल होगी अगर आज परेशाँ नहीं होगी
वो ज़ुल्फ़ जिसे हम ने सँवारा नहीं होगा
शमशीर कभी वक़्त की चल ही नहीं सकती
जब तक तिरी चितवन का इशारा नहीं होगा
जब तर्क-ए-त'अल्लुक़ का सितम झेल चुके हम
फिर कौन सा ग़म है जो गवारा नहीं होगा
दुनिया में मिरी जान के दुश्मन तो बहुत हैं
तुम जैसे हो ऐसा कोई प्यारा नहीं होगा
हम को कोई उम्मीद ज़माने से नहीं है
जो तेरा हुआ है वो हमारा नहीं होगा
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