पाँव काँटों पे तो फूलों पे नज़र रखते हैं

By ustad-vajahat-husain-khanJanuary 5, 2024
पाँव काँटों पे तो फूलों पे नज़र रखते हैं
फ़िक्र-ए-मंज़िल है बड़ा 'अज़्म-ए-सफ़र रखते हैं
बस उन्हीं लोगों की तक़दीर बदल सकती है
जो गुज़रते हुए हर पल की ख़बर रखते हैं


उन को हर हाल में अंदेशा-ए-रुस्वाई है
जो सदा ग़ैर के 'ऐबों पे नज़र रखते हैं
कौन क़ातिल को सज़ा दे सके मुंसिफ़ बन के
वो कहाँ हैं जो परखने का हुनर रखते हैं


गर्दिश-ए-वक़्त का चलता नहीं जादू उन पर
ख़ुद को हर हाल में जो सीना-सिपर रखते हैं
जौहरी शे'र-ओ-अदब के यहाँ छुपते हैं कहाँ
अपनी जेबों में छुपाए ये गुहर रखते हैं


तेरी बातों में 'वजाहत' है बला की हिकमत
दब ही जाते हैं वो तुझ से जो जिगर रखते हैं
45574 viewsghazalHindi