पता नहीं हमें देने हैं इम्तिहाँ क्या क्या

By sarahat-ahmad-sarahatJanuary 4, 2024
पता नहीं हमें देने हैं इम्तिहाँ क्या क्या
ख़राज लेगी मोहब्बत कहाँ कहाँ क्या क्या
वो अंजुमन कि जहाँ होश उड़ते जाते हैं
न हम से पूछो के देख आए हम वहाँ क्या क्या


क़दम क़दम पे हर इक सम्त कामरानी के
नुक़ूश छोड़ गई 'उम्र-ए-राएगाँ क्या क्या
मिलें तो कैसे मिलें दो दिलों के मिलने में
रुकावटें हैं ज़माने के दरमियाँ क्या क्या


ये वलवले ये 'अज़ाइम ये हौसले अपने
दिलासे देते हैं हम को कहाँ कहाँ क्या क्या
31281 viewsghazalHindi