फिर से कहना क्या समझे हो

By abdurrahman-mominJanuary 18, 2024
फिर से कहना क्या समझे हो
तुम मुझ को ऐसा समझे हो
तुम से पहले भी याँ तुम थे
तुम ख़ुद को पहला समझे हो


तुम तो अज़ल से साथ हो मेरे
क्यों ख़ुद को तन्हा समझे हो
ये कोई अच्छी बात नहीं है
तुम जिस को अच्छा समझे हो


ख़्वाब में क्यों आते हो मेरे
क्या मुझ को अंधा समझे हो
दर पर पहरे-दार बिठा कर
दरवाज़े को वा समझे हो


या'नी मैं जितना समझा था
तुम भी बस उतना समझे हो
मेरी जान यही लम्हा है
तुम जिस को लम्हा समझे हो


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