फूल की बातें करो या ख़ार की बातें करो

By ishrat-jahangirpuriJanuary 3, 2024
फूल की बातें करो या ख़ार की बातें करो
गुलसिताँ वालो मगर मे'यार की बातें करो
अहल-ए-‘आलम ग़ुंचा-ओ-गुल के फ़साने छोड़ दो
है अगर हिम्मत तो बढ़ कर दार की बातें करो


नासेहो ज़िक्र-ए-रह-ए-दैर-ओ-हरम बे-फ़ैज़ है
मेरा दिल कहता है कू-ए-यार की बातें करो
आशियाँ का सेहन-ए-गुलशन का रविश का ज़िक्र क्या
आज तो सय्याद की रफ़्तार की बातें करो


अहल-ए-साहिल ज़िक्र-ए-साहिल से तो जी उक्ता गया
शरह तूफ़ाँ की करो मंजधार की बातें करो
सुन रहा हूँ देर से मश्क-ए-जफ़ा की दास्ताँ
काश यूँही तुम मिरे ईसार की बातें करो


दिल धड़क उठता है हो जाता है बरहम नज़्म-ए-होश
जब कभी उन के लब-ओ-रुख़्सार की बातें करो
किस ने 'इशरत' कह दिया ये शा'इरी आसान है
पहले सीखो नस्र फिर अश'आर की बातें करो


48753 viewsghazalHindi