क़ाफ़िला दिल का लुट गया होता
By ustad-azmat-hussain-khanJanuary 5, 2024
क़ाफ़िला दिल का लुट गया होता
हुस्न रहज़न कोई मिला होता
अपने दिल पर ही ए'तिबार नहीं
आप का ए'तिबार क्या होता
शिकवा-ए-ग़म न कर मोहब्बत में
ये न होता तो और क्या होता
जल्वा-ए-हुस्न कार-फ़रमा था
वर्ना यूँ तूर जल गया होता
मैं ख़ुद अपनी नज़र में आ न सका
वर्ना यूँ तुझ को ढूँढता होता
हुस्न होता ग़म-आश्ना 'मैकश'
'इश्क़-ए-मसरूर मुद्द'आ होता
हुस्न रहज़न कोई मिला होता
अपने दिल पर ही ए'तिबार नहीं
आप का ए'तिबार क्या होता
शिकवा-ए-ग़म न कर मोहब्बत में
ये न होता तो और क्या होता
जल्वा-ए-हुस्न कार-फ़रमा था
वर्ना यूँ तूर जल गया होता
मैं ख़ुद अपनी नज़र में आ न सका
वर्ना यूँ तुझ को ढूँढता होता
हुस्न होता ग़म-आश्ना 'मैकश'
'इश्क़-ए-मसरूर मुद्द'आ होता
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