क़ैद करना है सय्याद कर शौक़ से शाख़-ए-गुल पर मिरा आशियाँ छोड़ दे
By ishrat-jahangirpuriJanuary 3, 2024
क़ैद करना है सय्याद कर शौक़ से शाख़-ए-गुल पर मिरा आशियाँ छोड़ दे
इक तड़पते हुए दिल की आवाज़ है मेरी मेहनत न कर राएगाँ छोड़ दे
नाख़ुदा देख कर ये तरीक़-ए-जफ़ा कहिये इंसाफ़ से दिल पे गुज़रेगी क्या
ला के कोई सफ़ीना अगर आप का 'ऐन तूफ़ाँ में ऐ मेहरबाँ छोड़ दे
ऐ शब-ए-ग़म तू वक़्त-ए-सहर चल तो दी है जो तेरी ख़ुशी वो हमारी ख़ुशी
रोज़-ए-रौशन में भी दिल बहलता रहे कोई ऐसा इक अपना निशाँ छोड़ दे
फूँकना है अगर फूँक दे गुलसिताँ पूछती है 'अबस वज्ह-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ
मेरा सरमाया-ए-ज़िंदगी हैं यही चार तिनके ही बर्क़-ए-तपाँ छोड़ दे
हर क़दम पर मिले हैं फ़रेब-ए-हसीं है गवारा बहर-हाल शिकवा नहीं
फिर ये मुमकिन है कैसे बता नासेहा मेरा दिल मंज़िल-ए-इम्तिहाँ छोड़ दे
सहन-ए-गुलशन में हो लाख जौर-ओ-जफ़ा हर क़दम पर सज़ा भी मिले बे-ख़ता
फिर भी मुमकिन नहीं बुलबुल-ए-ख़ुश-नवा अपना मख़्सूस रंग-ए-बयाँ छोड़ दे
चाहता हूँ कि 'इशरत' जुनून-ए-वफ़ा हर क़दम पर रहे मेरा मुश्किल-कुशा
मरहले 'इश्क़ के सख़्त दुश्वार हैं क्या ख़बर साथ हस्ती कहाँ छोड़ दे
इक तड़पते हुए दिल की आवाज़ है मेरी मेहनत न कर राएगाँ छोड़ दे
नाख़ुदा देख कर ये तरीक़-ए-जफ़ा कहिये इंसाफ़ से दिल पे गुज़रेगी क्या
ला के कोई सफ़ीना अगर आप का 'ऐन तूफ़ाँ में ऐ मेहरबाँ छोड़ दे
ऐ शब-ए-ग़म तू वक़्त-ए-सहर चल तो दी है जो तेरी ख़ुशी वो हमारी ख़ुशी
रोज़-ए-रौशन में भी दिल बहलता रहे कोई ऐसा इक अपना निशाँ छोड़ दे
फूँकना है अगर फूँक दे गुलसिताँ पूछती है 'अबस वज्ह-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ
मेरा सरमाया-ए-ज़िंदगी हैं यही चार तिनके ही बर्क़-ए-तपाँ छोड़ दे
हर क़दम पर मिले हैं फ़रेब-ए-हसीं है गवारा बहर-हाल शिकवा नहीं
फिर ये मुमकिन है कैसे बता नासेहा मेरा दिल मंज़िल-ए-इम्तिहाँ छोड़ दे
सहन-ए-गुलशन में हो लाख जौर-ओ-जफ़ा हर क़दम पर सज़ा भी मिले बे-ख़ता
फिर भी मुमकिन नहीं बुलबुल-ए-ख़ुश-नवा अपना मख़्सूस रंग-ए-बयाँ छोड़ दे
चाहता हूँ कि 'इशरत' जुनून-ए-वफ़ा हर क़दम पर रहे मेरा मुश्किल-कुशा
मरहले 'इश्क़ के सख़्त दुश्वार हैं क्या ख़बर साथ हस्ती कहाँ छोड़ दे
23557 viewsghazal • Hindi