रस्म-ए-मातम को अदा नाज़ से करने वाले

By raft-bahraichiJanuary 4, 2024
रस्म-ए-मातम को अदा नाज़ से करने वाले
ख़ुश रहें फूल मिरी क़ब्र पे करने वाले
जुर्म-ए-उल्फ़त के सज़ा-वार ही ठहरे 'उश्शाक़
कुछ न पूछे गए महशर में मुकरने वाले


ज़ुल्म की ख़ू न छुटे शौक़-ए-जफ़ा भी न मिटे
एक ठोकर सही मरक़द पे गुज़रने वाले
ख़ुद ही दे देते हैं बढ़ कर वो अजल को पैग़ाम
मौत की राह नहीं देखते मरने वाले


वा’दा-ए-दीद पे 'राफ़त' को हो किस तरह यक़ीं
तुम तो हर वक़्त हो कह कह के मुकरने वाले
98420 viewsghazalHindi