सब की नज़रों में यूँ भी प्यारा हूँ
By faisal-qadri-gunnauriJanuary 2, 2024
सब की नज़रों में यूँ भी प्यारा हूँ
मैं तिरी इक नज़र का मारा हूँ
वक़्त के साथ मुझ को बहना है
मैं तो पानी का एक धारा हूँ
तुम ने जब अपना कह दिया है मुझे
कैसे कह दूँ कि बे-सहारा हूँ
'इश्क़ में क्या यही नहीं काफ़ी
मेरे तुम और मैं तुम्हारा हूँ
चाहता मैं तो जीत सकता था
तेरी ख़ातिर ये बाज़ी हारा हूँ
यूँ खटकता हूँ सब की आँखों में
तेरी आँखों का मैं जो तारा हूँ
तुझ से 'फ़ैसल' है बाहमी रिश्ता
तू है कश्ती तो मैं किनारा हूँ
मैं तिरी इक नज़र का मारा हूँ
वक़्त के साथ मुझ को बहना है
मैं तो पानी का एक धारा हूँ
तुम ने जब अपना कह दिया है मुझे
कैसे कह दूँ कि बे-सहारा हूँ
'इश्क़ में क्या यही नहीं काफ़ी
मेरे तुम और मैं तुम्हारा हूँ
चाहता मैं तो जीत सकता था
तेरी ख़ातिर ये बाज़ी हारा हूँ
यूँ खटकता हूँ सब की आँखों में
तेरी आँखों का मैं जो तारा हूँ
तुझ से 'फ़ैसल' है बाहमी रिश्ता
तू है कश्ती तो मैं किनारा हूँ
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