सब सिकंदर ग़ज़नवी बाबर के शैदाई मिले

By mirza-naseer-khalidJanuary 4, 2024
सब सिकंदर ग़ज़नवी बाबर के शैदाई मिले
कोई तो मुझ को यहाँ पोरस का भी भाई मिले
अब भी है इंसाँ जहालत के उसी मे'यार पर
आज भी मंसूर आ जाए तो रुस्वाई मिले


चाहतों में बस ख़सारा ही ख़सारा है मगर
लोग जितने भी मिले चाहत के शैदाई मिले
थक चुके हैं रात दिन की अंजुमन-आराई से
ऐ हुजूम-ए-शहर अब थोड़ी सी तन्हाई मिले


बख़्श दीजे अब हमें भी बारयाबी का शरफ़
मुंतज़िर कब से खड़े हैं कुछ तो शुनवाई मिले
फ़िक्र की गहराई से निकले अछूता जब ख़याल
क्यों न हर महफ़िल में फिर उस को पज़ीराई मिले


दोस्त शामिल हो गए 'ख़ालिद' 'अदू की फ़ौज में
मो'जिज़ा होगा अगर अब भी न पसपाई मिले
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