सब्र कर सब्र की घड़ी है अभी

By parvez-shaikhJanuary 4, 2024
सब्र कर सब्र की घड़ी है अभी
इतनी मुश्किल से जो मिली है अभी
वक़्त से पहले मौत अच्छी नहीं
ज़िंदगी सामने पड़ी है अभी


आँख रंजूर हो गई मेरी
उस ने जाने की ज़िद गढ़ी है अभी
बा'द तेरे कोई नहीं होगा
तू मिरी आख़िरी ख़ुशी है अभी


तू भी 'परवेज़' को समझ न सका
तंज़ तेरा भी लाज़मी है अभी
28183 viewsghazalHindi