साए की तरह क़ब्ज़ा-ए-पैकर से निकल कर
By mohsin-changeziJanuary 4, 2024
साए की तरह क़ब्ज़ा-ए-पैकर से निकल कर
वो शख़्स गया मेरे बराबर से निकल कर
फिर देर तलक मुझ से रहा महव-ए-तकल्लुम
इक शख़्स मिरे अपने ही अंदर से निकल कर
हम लोग अभी क़ाइल-ए-तक़दीर हैं 'मोहसिन'
हम लोग कहाँ जाएँ मुक़द्दर से निकल कर
वो शख़्स गया मेरे बराबर से निकल कर
फिर देर तलक मुझ से रहा महव-ए-तकल्लुम
इक शख़्स मिरे अपने ही अंदर से निकल कर
हम लोग अभी क़ाइल-ए-तक़दीर हैं 'मोहसिन'
हम लोग कहाँ जाएँ मुक़द्दर से निकल कर
66903 viewsghazal • Hindi