सहारे उन के जब हासिल नहीं हैं
By basir-tonkiJanuary 2, 2024
सहारे उन के जब हासिल नहीं हैं
तो जीने के मज़े कामिल नहीं हैं
निगाहें काम कर जाती हैं दिल का
ख़ुदा शाहिद कि वो क़ातिल नहीं हैं
न शाम-ए-ग़म न सुब्ह-ए-ज़िंदगानी
यही दिलचस्पियाँ हासिल नहीं हैं
जिन्हें एहसास-ए-ख़ुद्दारी है ऐ दोस्त
हैं फ़ाक़ा-कश मगर साइल नहीं हैं
ये ख़ास-ओ-‘आम की तफ़रीक़ कैसी
हम इस तफ़रीक़ के क़ाइल नहीं हैं
ख़ला में उड़ के पहुँचे हैं कुछ इंसाँ
मगर इस काम में कामिल नहीं हैं
चमन में रह गए मुरझा के जो फूल
वो 'बासिर' हार के क़ाबिल नहीं हैं
तो जीने के मज़े कामिल नहीं हैं
निगाहें काम कर जाती हैं दिल का
ख़ुदा शाहिद कि वो क़ातिल नहीं हैं
न शाम-ए-ग़म न सुब्ह-ए-ज़िंदगानी
यही दिलचस्पियाँ हासिल नहीं हैं
जिन्हें एहसास-ए-ख़ुद्दारी है ऐ दोस्त
हैं फ़ाक़ा-कश मगर साइल नहीं हैं
ये ख़ास-ओ-‘आम की तफ़रीक़ कैसी
हम इस तफ़रीक़ के क़ाइल नहीं हैं
ख़ला में उड़ के पहुँचे हैं कुछ इंसाँ
मगर इस काम में कामिल नहीं हैं
चमन में रह गए मुरझा के जो फूल
वो 'बासिर' हार के क़ाबिल नहीं हैं
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