सजा रहा हूँ मैं दुनिया को यूँ क़रीने से
By rohit-gaur-ruuhJanuary 4, 2024
सजा रहा हूँ मैं दुनिया को यूँ क़रीने से
मज़ा ही ख़त्म है जीने का मेरे जीने से
कटा जिगर है फटा दिल बदन मिरा ज़ख़्मी
न फ़ैज़ चाक-ए-गरेबाँ को अब के सीने से
'अदू से कैसा गिला है वो रश्क का मारा
यहाँ तो दोस्त मिले सब के सब कमीने से
करूँ हूँ 'रूह' फ़क़त प्यार की ही मज़दूरी
तभी तो आती है ख़ुशबू मिरे पसीने से
मज़ा ही ख़त्म है जीने का मेरे जीने से
कटा जिगर है फटा दिल बदन मिरा ज़ख़्मी
न फ़ैज़ चाक-ए-गरेबाँ को अब के सीने से
'अदू से कैसा गिला है वो रश्क का मारा
यहाँ तो दोस्त मिले सब के सब कमीने से
करूँ हूँ 'रूह' फ़क़त प्यार की ही मज़दूरी
तभी तो आती है ख़ुशबू मिरे पसीने से
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