सलीक़े से अगर तोड़ें तो काँटे टूट जाते हैं

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
सलीक़े से अगर तोड़ें तो काँटे टूट जाते हैं
मगर अफ़सोस ये है फूल पहले टूट जाते हैं
बिछड़ कर आप से ये तज्रबा हो ही गया आख़िर
मैं अक्सर सोचता था लोग कैसे टूट जाते हैं


मोहब्बत बोझ बन कर ही भले रहती हो काँधों पर
मगर ये बोझ हटता है तो काँधे टूट जाते हैं
मिरी औक़ात ही क्या है मैं इक नन्हा सा आँसू हूँ
बुलंदी से तो गिर कर अच्छे अच्छे टूट जाते हैं


ज़ियादा कामयाबी भी बहुत नुक़्सान देती है
फलों का बोझ बढ़ने से भी पौदे टूट जाते हैं
बहुत दिन मस्लहत की क़ैद में रहते नहीं जज़्बे
मोहब्बत जब सदा देती है पिंजरे टूट जाते हैं


सितम ये है मैं उस रस्ते पे नंगे पाँव चलता हूँ
जहाँ चलते हुए लोगों के जूते टूट जाते हैं
91412 viewsghazalHindi