समा'अत से जब आवाज़ों का नाता टूट जाता है
By anaam-damohiFebruary 5, 2024
समा'अत से जब आवाज़ों का नाता टूट जाता है
तो अपने आप में इंसान कितना टूट जाता है
भरोसा टूटने पर किस लिए अफ़सोस करते हो
यहाँ तो जिस्म से साँसों का रिश्ता टूट जाता है
कोई हमराज़ हम-साया ज़रूरी होता है यारो
सफ़र में ज़ीस्त के इंसान तन्हा टूट जाता है
अना अब छोड़ दो तुम और मैं भी छोड़ता हूँ ज़िद
ये बल पड़ते हैं तो हर एक धागा टूट जाता है
मिरा अरमान मेरा ख़्वाब मेरा दिल मिरा जज़्बा
ख़फ़ा होने से तेरे देख क्या क्या टूट जाता है
मैं इंसाँ हूँ अगर मैं टूट भी जाऊँ तो हैरत क्या
नज़र लगने से तो बे-जान शीशा टूट जाता है
तो अपने आप में इंसान कितना टूट जाता है
भरोसा टूटने पर किस लिए अफ़सोस करते हो
यहाँ तो जिस्म से साँसों का रिश्ता टूट जाता है
कोई हमराज़ हम-साया ज़रूरी होता है यारो
सफ़र में ज़ीस्त के इंसान तन्हा टूट जाता है
अना अब छोड़ दो तुम और मैं भी छोड़ता हूँ ज़िद
ये बल पड़ते हैं तो हर एक धागा टूट जाता है
मिरा अरमान मेरा ख़्वाब मेरा दिल मिरा जज़्बा
ख़फ़ा होने से तेरे देख क्या क्या टूट जाता है
मैं इंसाँ हूँ अगर मैं टूट भी जाऊँ तो हैरत क्या
नज़र लगने से तो बे-जान शीशा टूट जाता है
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