सारा क़िस्सा तमाम होने को है
By faisal-qadri-gunnauriJanuary 2, 2024
सारा क़िस्सा तमाम होने को है
दिल किसी का ग़ुलाम होने को है
मुझ से वो हम-कलाम होने को है
ऐसा लगता है काम होने को है
सारा दिन इंतिज़ार में गुज़रा
अब तो आ जाओ शाम होने को है
'आशिक़ों का लगा है इक मजमा'
जल्वा-ए-यार 'आम होने को है
हाए अफ़सोस कुछ न कर पाए
ज़ीस्त का इख़्तिताम होने को है
दिल में हलचल ये कैसी है 'फ़ैसल'
क्या किसी का क़ियाम होने को है
दिल किसी का ग़ुलाम होने को है
मुझ से वो हम-कलाम होने को है
ऐसा लगता है काम होने को है
सारा दिन इंतिज़ार में गुज़रा
अब तो आ जाओ शाम होने को है
'आशिक़ों का लगा है इक मजमा'
जल्वा-ए-यार 'आम होने को है
हाए अफ़सोस कुछ न कर पाए
ज़ीस्त का इख़्तिताम होने को है
दिल में हलचल ये कैसी है 'फ़ैसल'
क्या किसी का क़ियाम होने को है
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