शक में जकड़े से सवालात कहाँ जानते हैं
By aftab-shahFebruary 23, 2025
शक में जकड़े से सवालात कहाँ जानते हैं
'इश्क़ वाले ये ख़ुराफ़ात कहाँ जानते हैं
आप वाक़िफ़ हैं मिरे दोस्त हसीं लफ़्ज़ों से
बदले लहजों की करामात कहाँ जानते हैं
आप ने देखा है दरिया को मगन बहते हुए
इस में डूबे जो मज़ाफ़ात कहाँ जानते हैं
जब वो बिछड़ेगा तो सोचों का भँवर कहता है
अपनी होगी भी मुलाक़ात कहाँ जानते हैं
आप ने जिस को बना रक्खा है भोला-भाला
उस की मस्ती के कमालात कहाँ जानते हैं
ग़म की ईंटों से मकाँ अपना बनाने वाले
रस्म-ए-उल्फ़त के मज़ारात कहाँ जानते हैं
माँग लेते हैं भरोसे पे कि वो दे देगा
हम ख़ता-कार मुनाजात कहाँ जानते हैं
'इश्क़ वाले ये ख़ुराफ़ात कहाँ जानते हैं
आप वाक़िफ़ हैं मिरे दोस्त हसीं लफ़्ज़ों से
बदले लहजों की करामात कहाँ जानते हैं
आप ने देखा है दरिया को मगन बहते हुए
इस में डूबे जो मज़ाफ़ात कहाँ जानते हैं
जब वो बिछड़ेगा तो सोचों का भँवर कहता है
अपनी होगी भी मुलाक़ात कहाँ जानते हैं
आप ने जिस को बना रक्खा है भोला-भाला
उस की मस्ती के कमालात कहाँ जानते हैं
ग़म की ईंटों से मकाँ अपना बनाने वाले
रस्म-ए-उल्फ़त के मज़ारात कहाँ जानते हैं
माँग लेते हैं भरोसे पे कि वो दे देगा
हम ख़ता-कार मुनाजात कहाँ जानते हैं
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