शौक़-ए-सैराबी की धुन में तिश्नगी मरवाएगी

By mustafa-adeebJanuary 4, 2024
शौक़-ए-सैराबी की धुन में तिश्नगी मरवाएगी
मुझ को तेरे 'इश्क़ में ये आगही मरवाएगी
यूँ रगों में चीख़ता फिरता है इक सैल-ए-जुनूँ
बोल वर्ना ये मुसलसल ख़ामुशी मरवाएगी


ख़ुशबूओं से दश्त महकाता रहा मैं शौक़ से
क्या ख़बर थी ये मिरी शाइस्तगी मरवाएगी
मैं कहाँ और ख़ुश-गुमानी का ये हंगामा कहाँ
मुझ को अब ये ख़्वाहिश-ए-आसूदगी मरवाएगी


दार पर तुझ को अगर इज़्न-ए-तकल्लुम हो 'अदीब'
उन से कह देना तुझे भी ज़िंदगी मरवाएगी
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