शिद्दत बला की होती है जिस वक़्त प्यास में

By chand-kakralviJanuary 19, 2024
शिद्दत बला की होती है जिस वक़्त प्यास में
दरिया दिखाई देता है ख़ाली गिलास में
वो चीज़ ढूँडने से भी मिलती है फिर कहाँ
जो चीज़ खोई जाती है होश-ओ-हवास में


उन रास्तों से हम को गुज़ारा फ़रेब ने
काँटे छुपे हुए थे जहाँ नर्म घास में
बेकार कर रहे हैं शिकायत नसीब से
रेशम के कीड़े पालने वाले कपास में


हम ने क़लम की नोक चला कर दिमाग़ पर
टाँके हैं बेल बूटे ग़ज़ल के लिबास में
ऐ 'चाँद' मेरी सम्त अभी अपना रुख़ न कर
इस वक़्त कोई और है मेरे क़यास में


92750 viewsghazalHindi