सीने में अरमान की गंगा आँखों में जमुना का है जल

By badiuzzaman-saharJanuary 19, 2024
सीने में अरमान की गंगा आँखों में जमुना का है जल
लेकिन दिल के ताज-महल में कोई नहीं मुम्ताज़ महल
किस को बतलाएँ कि क्या है जज़्ब-ए-दरूँ एहसास-ए-वफ़ा
किस के ग़म में नग़्मा-ए-दिल है किस की है तस्वीर ग़ज़ल


आहें आँसू गिर्या-ओ-हसरत सोज़-ए-दरूँ हंगामा-ए-वहशत
इन शो'लों में जो न तपा हो क्या जाने वो दर्द-ए-बग़ल
मयख़ाने में जाम बदल दे चाहे मय-ए-गुलफ़ाम बदल दे
कम-अज़-कम ऐ पीर-ए-मुग़ाँ तू रस्म-ए-रवादारी न बदल


क्या समझे वो नश्शा-ए-मय को क्या जाने ज़ुन्नार क़दह को
तू ही दर्द-आशाम को साक़ी बतला दे तहदीद-ए-'अमल
रुख़ की धूप आईना-ए-ताबाँ मार-गज़ीदा काकुल-ए-पेचाँ
दिलकश रूप और चाह-ए-ज़नख़दाँ सब हैं 'सहर' सामान-ए-अजल


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